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लब को आजाद करने दो मुट्ठी भींच लेने दो
उन्हें तस्वीर जमाने की जरा सा खींच लेने दो
तुम पीपल हो पी लोगो समंदर भी मगर रुको
नई जो पौध पनपी हैं इन्हें भी सींच लेंने दो

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