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लिपटे रहिये आप अपने सच और संस्कार में
सब कुछ झूठा सा हैं अब ईमान के व्यापार में
कौन कहता हैं यंहा सिर्फ अखबार बिकते हैं
कलम भी बिकने लगी आजकल अख़बार में

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झाड़ियों को ही गुलाब लिख डाला
सवालों को ही जबाब लिख डाला
झोपड़ियों में वो रहते हैं मुश्किल से
तुमने आंकड़ो में नबाब लिख डाला
दो जून की रोटी मयस्सर नही होती
तुमने थाली में कबाब लिख डाला
आंधियो से उड़ गया आशियाना मेरा
तुमने मौसम का सबाब लिख डाला

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लब को आजाद करने दो मुट्ठी भींच लेने दो उन्हें तस्वीर जमाने की जरा सा खींच लेने दो तुम पीपल हो पी लोगो समंदर भी मगर रुको नई जो पौध पनपी हैं इन्हें भी सींच लेंने दो
आसमानी तारे भी सुनहरे लाल नीले हो गए  जब घर की बेटी लाडली के हाथ पीले हो गए  मुस्कराते रहे "पापा" बेटी के जाने तक मगर उसके बाद यूँ रोये की सबके पोर गीले हो गए