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यंहा हमारी बस्ती में खाने के लाले पड़े

1-:
बंदिशें इतनी बढ़ी हर मोड़ पर ताले पड़े
बंदिशों को तोड़ने में हाथ में छाले पड़े
भुखमरी पर चर्चा पंचसितारा होटलों में
यंहा हमारी बस्ती में खाने के लाले पड़े

2-:
उदघाटन हुआ था बड़ा ढोल ताशे के साथ
बच्चो में मूंगफली बटी थी बताशे के साथ
आज तक बनी नही सड़क वो मेरे गांव की
उम्मीद भी ख़त्म हो गयी तेरे झांसे के साथ

3-:
नदी की लहर में बहते हुए उस पार चले गए
सत्ता फिसली हाथ से कि सरकार चले गए
जब देखो भरी धूल और जाले लगे हुए कहीं
समझो मकान खाली हैं किरायेदार चले गए

4-:
बड़ी जिम्मेदारी का बोझ लिए शहर गया
फिर लौट के न कभी वो अपने घर गया
जिसके पास थी गांव में बीघे भर जमीन
सुना हैं वो भूख से फुटपाथ पर मर गया

©देव शर्मा

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