सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

हैप्पी रोज डे

हैप्पी रोज डे 😊😊 सुन कर चेहरे पर मुस्कान खिल जाना रोम रोम में इश्क भर जाना वाजिब है भाई (शादी शुदा मित्र अहसास से काम चलाये) रोज डे यानि गुलाब दिवस... आज किसी से गुलाब पाकर खुश हो रहे लोगो को बता दूं कि पूरे देश मे गुलाब की 100 प्रजाति मौजूद है आपके "वो" बाकी 99 प्रजाति का गुलाब किसे दे रहे होंगे जरा सोचिए...और जो गुलाब देने वाले लोग है सुनो.. चियर्स यार ...कम से कम 100 को तो दे ही सकते है कसम खा कर की "ये गुलाब तो सिर्फ तुम्हे दिया है" ...खैर जिसे आप rose rose कह कर फूले नही समा रहे है उसका रियाल वैज्ञानिक नाम Rosoideae है "माग्नोल्योप्सीदा" वर्ग का यह पौधा कई लाख साल से धरती पर है...और किसी के चेहरे को गुलाब बोलने से पहले ध्यान रखिएगा की कैटल गुलाब जैसे 7 प्रजाति के गुलाब विषैले काले और भद्दे भी होते है ...कोई आपको गुलाब कहे तो बेधड़क पूछ लीजिये "कौन सा गुलाब" 
एक बात और जान लीजिए आप आज यानि 7 फरवरी को कितना भी rose day रोज डे कर लीजिए भारत सरकार आधिकारिक रूप से 12 फरवरी को "रोज डे" मनाती है...संस्कृति के पहरुओं के लिए भी एक जानकारी अब कोई "गुलाब" कहता मिले तो दीजियेगा कान के नीचे क्योकि गुलाब हिन्दी नही बल्कि फ़ारसी भाषा है हिंदी में तो पाटलम्, कर्णिका देवपुष्प और तमिल में इराशा कहते है अब बंगाल में चुनाव है तो बंगाली में बताना जरूरी है तो बाबू मोशाय गुलाब को बंगाली में गोलाप कहते है और बंगाली बाबू रवीन्द्रनाथ टैगोर गुलाब के लिये कहते थे ‘‘अगर तुम्हारे पास दो रोटी हैं तो उनमें से एक को बेचकर गुलाब ले आओ।'’ .
एक और मजेदार बात गुलाब क्रांति सुनकर लग रहा होगा कि ये गुलाब की खेती से सम्बंधित होगा न जी न गुलाब क्रांति झींगा मछली के उत्पादन से सम्बंधित है ...सुबह गुलाब दीजिये और शाम को गुलाबी क्रांति फ्राई कीजिये 😊😊😊 HAPPY ROSE DAY

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

लब को आजाद करने दो मुट्ठी भींच लेने दो उन्हें तस्वीर जमाने की जरा सा खींच लेने दो तुम पीपल हो पी लोगो समंदर भी मगर रुको नई जो पौध पनपी हैं इन्हें भी सींच लेंने दो
आसमानी तारे भी सुनहरे लाल नीले हो गए  जब घर की बेटी लाडली के हाथ पीले हो गए  मुस्कराते रहे "पापा" बेटी के जाने तक मगर उसके बाद यूँ रोये की सबके पोर गीले हो गए
1 लिपटे रहिये आप अपने सच और संस्कार में सब कुछ झूठा सा हैं अब ईमान के व्यापार में कौन कहता हैं यंहा सिर्फ अखबार बिकते हैं कलम भी बिकने लगी आजकल अख़बार में 2 झाड़ियों को ही गुलाब लिख डाला सवालों को ही जबाब लिख डाला झोपड़ियों में वो रहते हैं मुश्किल से तुमने आंकड़ो में नबाब लिख डाला दो जून की रोटी मयस्सर नही होती तुमने थाली में कबाब लिख डाला आंधियो से उड़ गया आशियाना मेरा तुमने मौसम का सबाब लिख डाला